खाद्य मिलावट के खिलाफ दामित गहलोत राजस्थान के बीकानेर से दिल्ली तक 21 दिन की पदयात्रा और फिर 24 सितंबर से जंतर-मंतर पर आमरण अनशन

दामित गहलोत नाम के इस युवक ने खाद्य मिलावट के खिलाफ ऐसी मुहिम छेड़ी है, जिसका सीधा संबंध देश के हर परिवार, हर बच्चे और हर बुजुर्ग की सेहत से है।
करीब दस दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे दामित गहलोत की मांग है कि खाद्य पदार्थों में जानलेवा मिलावट और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक रसायनों के इस्तेमाल के खिलाफ बेहद सख्त कानून बनाए जाएं। यहां तक कि गंभीर मामलों में फांसी जैसे कठोर दंड का प्रावधान करने की मांग भी उठाई जा रही है।
सवाल बेहद गंभीर है—जब हमारी थाली में पहुंचने वाला भोजन ही हमारी सेहत के लिए खतरा बन जाए, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है?
दामित गहलोत के अभियान को सोशल मीडिया पर देशभर से समर्थन मिलने के दावे किए जा रहे हैं। वहीं, आंदोलन को लेकर पुलिस और प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।
आंदोलनकारी का आरोप है कि उन्हें दिल्ली में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने की अनुमति नहीं मिल रही और पुलिस उन्हें बार-बार दिल्ली की सीमाओं से बाहर भेज देती है। उनका कहना है कि इसके बावजूद उनका आंदोलन रुकने वाला नहीं है। दिल्ली-एनसीआर में अलग-अलग स्थानों पर वे अपना विरोध जारी रखने की कोशिश कर रहे हैं।
आलोचकों के सवाल अपनी जगह हैं, लेकिन खाद्य सुरक्षा का मुद्दा किसी राजनीतिक दल तक सीमित नहीं है। यह आम नागरिक के जीवन, स्वास्थ्य और अधिकारों से जुड़ा सवाल है।
क्या खाद्य मिलावट के खिलाफ मौजूदा कानून पर्याप्त हैं? क्या आमरण अनशन कर रहे इस युवक की मांगों पर सरकार और प्रशासन कोई स्पष्ट जवाब देंगे? और आखिर देश की थाली को सुरक्षित बनाने की जिम्मेदारी कौन निभाएगा?
देखिए हमारी यह विशेष रिपोर्ट—दामित गहलोत का आंदोलन, उनकी मांगें और खाद्य सुरक्षा से जुड़े वे सवाल, जिनके जवाब हर नागरिक जानना चाहता है