न्याय लोगों से कितनी दूर होता जा रहा है इसका उदाहरण बलिया से देखने को मिला। उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में एक बुजुर्ग विधवा महिला श्रीमती कंचनलता पाण्डेय वर्षों से अपनी पैतृक खेतीहर भूमि और मकान को चचेरे भाइयों द्वारा कथित जाली दस्तावेजों के आधार पर हड़पने के खिलाफ लड़ रही हैं। उच्चतम स्तर पर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री कार्यालय तक मामला पहुंच चुका है, फिर भी जिला प्रशासन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर सका है। महिला ने चेतावनी दी है कि अगर एक माह में न्याय नहीं मिला तो वह मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ के आवास पर आत्मदाह कर लेंगी।
बलिया से माँ ने मांगा इन्साफ: चचेरे भाइयों पर जमीन हड़पने का आरोप, राष्ट्रपति-पीएम-सीएम के आदेश के बावजूद प्रशासन सोया, न्याय नहीं तो योगी आवास पर आत्मदाह
बता दें कि श्रीमती कंचनलता पाण्डेय स्व. राधामोहन पाण्डेय और स्व. चंद्रावती देवी की एकमात्र संतान हैं, जो ग्राम एकवारी, थाना फेफना, जिला बलिया की निवासी हैं। उनके अनुसार, चचेरे भाई रामप्रवेश पाण्डेय और उनकी पत्नी राजकुमारी उर्फ गजेश्वरी देवी ने अपने तीन बेटों जिसमें लव कुमार पाण्डेय, कुश कुमार पाण्डेय (जुड़वां) और अमित कुमार पाण्डेय के नाम को कथित तौर पर फर्जी तरीके से उनके माता-पिता के सगे पुत्रों के रूप में दर्ज करा लिया।
जानकारी के अनुसार यह षड्यंत्र परिवार रजिस्टर, मतदाता सूची, आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य सरकारी दस्तावेजों में हेराफेरी करके किया गया, ताकि पैतृक संपत्ति पर कब्जा किया जा सके। महिला ने आरोप लगाया कि उनके पिता की मृत्यु के बाद भी इन लोगों ने तहसीलदार को गुमराह करने की कोशिश की, लेकिन जांच में कई दावे खारिज हो चुके हैं।
2015 में तहसीलदार के आदेश पर नामांतरण की आपत्ति दर्ज की गई, लेकिन बाद में बैकडेट में नामांतरण कर दिया गया।
परिवार रजिस्टर में संशोधन के लिए ग्राम सभा में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास हुआ, जिसमें कंचनलता को एकमात्र वारिस बताया गया। सहायक विकास अधिकारी ने तीनों के नाम निरस्त करने का आदेश भी दिया।
इसके बावजूद, निर्वाचन विभाग और अन्य विभागों में मिलीभगत का आरोप लगाते हुए महिला ने कहा कि नाम फिर से उनके पिता के सगे पुत्रों के रूप में दर्ज करा लिए गए।
जिला निर्वाचन अधिकारी को 2025 में आवेदन दिया गया, जांच हुई लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
महिला का कहना है कि जिला प्रशासन उनके सभी आवेदनों को या तो लंबित रखता है या कोर्ट में लंबित दिखाकर टाल देता है। यह मामला सरकारी तंत्र में ढिलाई और उच्चाधिकारियों के आदेशों का मखौल उड़ाने का ज्वलंत उदाहरण बन गया है।
लखनऊ के प्रेस क्लब में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कंचनलता पाण्डेय ने पूरे मामले का विस्तार से ब्योरा दिया। उन्होंने बताया कि उनके पति स्व. दीनानाथ पाण्डेय की 2017 में असामयिक मृत्यु हो गई थी। वह सरस्वती विद्यामंदिर, ककरी, सोनभद्र में सहायक अध्यापक थे। अब उनकी आय का कोई स्रोत नहीं है। चार बच्चे शादी के योग्य हैं, लेकिन धनाभाव के कारण उनकी शिक्षा और शादी नहीं हो पा रही।
उन्होंने कई बार मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री और राज्यपाल को बच्चों की शिक्षा के लिए सहायता मांगी, लेकिन कोई राहत नहीं मिली। अंत में राष्ट्रपति को उच्चस्तरीय जांच की अपील की, जिस पर मुख्य सचिव, उत्तर प्रदेश को निर्देश जारी हुए।
कंचनलता ने कहा बातचीत में कहा, “मैं जीवन के अंतिम दौर में हूं। अगर एक माह में मेरा मामला नहीं सुलझाया गया तो मैं मुख्यमंत्री जी के आवास पर पेट्रोल डालकर आत्मदाह कर लूंगी। मैं दौड़-दौड़कर थक चुकी हूं।” उन्होंने बताया कि मुखयमंती ने निवेदन है कि मुझे आर्थिक सहायता की जाए जिससे परिवार की जीविका चला सकूँ।
मालूम हो कि बलिया प्रधानमंत्री स्व. चंद्रशेखर जी का निर्वाचन क्षेत्र रहा है, जिसे “आजाद होने वाला पहला जिला” कहा जाता है। महिला ने इस बात पर आश्चर्य जताया कि इतने उच्च स्तरीय हस्तक्षेप के बावजूद जिला स्तर पर न्याय नहीं मिल रहा।
बता दें कि यह मामला उत्तर प्रदेश में भूमि विवाद और कब्जा माफिया की समस्या को फिर रेखांकित करता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में भूमि कब्जा मामलों में सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं, लेकिन इस मामले में अभी तक जिला प्रशासन की ओर से कोई ठोस पहल नहीं दिखी है।
कंचनलता पाण्डेय ने आग्रह किया है कि जल्द से जल्द जांच कर उनके हक की रक्षा की जाए, ताकि एक असहाय विधवा को न्याय मिल सके।
