नोएडा मुआवज़ा, स्वैग और बर्बादी की दास्तां

नोएडा मुआवज़ा, स्वैग और बर्बादी की दास्तां

नोएडा के एक गाँव की ये कहानी किसी फिल्म से कम नहीं है, लेकिन इसका अंत दुखद है। ज़मीन गई, करोड़ों आए: एक किसान के बेटे ‘हर्ष’ के पास जब 2 करोड़ का मुआवज़ा आया, तो उसे लगा दुनिया उसके कदमों में है। ​3 बीघा ज़मीन के बदले मिले पैसों से सबसे पहले ली गई Thar। ​आलीशान कोठी बनी, बहनों की शादियाँ हुईं। ​खर्च ऐसा किया मानो ये तिजोरी कभी खाली नहीं होगी।

​दिखावे की अंधी दौड़: बिना किसी बिज़नेस या निवेश के, सारा पैसा शौक-मौज में उड़ गया। आलम ये हुआ कि कल तक करोड़ों में खेलने वाले के पास आज थार में तेल डलवाने के पैसे नहीं बचे।

​एक गलती और सब खत्म: शान दिखाने की आदत ऐसी पड़ी कि हर्ष ने पेट्रोल पंप पर तेल भरवाया और बिना पैसे दिए गाड़ी भगा ली। नतीजा? पुलिस ने धर लिया और अब सलाखों के पीछे है। आज की हकीकत आज घर में मातम जैसा सन्नाटा है। जिस भाई ने अपनी शान के लिए करोड़ों उड़ाए, आज उसके पास ज़मानत तक के पैसे नहीं हैं। बूढ़े पिता और परिवार दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं। दिखावे की शान, अक्सर श्मशान तक ले जाती है।

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