रेजिडेंट्स ने AAOA को सर्वसम्मति से किया बर्खास्त, तानाशाही और अपारदर्शिता के खिलाफ प्रदर्शन

रेजिडेंट्स ने AAOA को सर्वसम्मति से किया बर्खास्त, तानाशाही और अपारदर्शिता के खिलाफ प्रदर्शन

आम्रपाली गोल्फ होम्स एवं किंग्सवुड सोसाइटी में आज दिनांक 18 जनवरी 2026 को आयोजित जनरल बॉडी मीटिंग (GBM) के दौरान रेजिडेंट्स ने एक ऐतिहासिक और निर्णायक कदम उठाते हुए मौजूदा एडहॉक अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन (AAOA) को सर्वसम्मति से विघटित कर दिया।

जीबीएम की शुरुआत से ही AAOA मेंबर्स का तानाशाही और असहयोगात्मक रवैया सामने आया। रेजिडेंट्स द्वारा पिछली जीबीएम में लिए गए निर्णयों और उनके अनुपालन की जानकारी मांगे जाने पर AAOA पदाधिकारी कोई स्पष्ट जवाब देने में असफल रहे। लगभग चार महीने बाद बुलाई गई इस जीबीएम में रेजिडेंट्स के कई गंभीर और महत्वपूर्ण सवाल थे, लेकिन उन्हें बोलने का अवसर नहीं दिया गया और माइक तक देने से इनकार कर दिया गया।

जीबीएम में उपस्थित रेजिडेंट्स ने हाल ही में पास किए गए एफएमएस (Facilities Management Services) टेंडर का पूरा विवरण मांगा, जिसमें लगभग डेढ़ करोड़ रुपये प्रति माह की एजेंसी को नियुक्त किया गया है। AAOA मेंबर्स ने टेंडर से जुड़े किसी भी दस्तावेज़ को साझा करने से साफ इनकार कर दिया, जिससे टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए।

स्थिति उस समय और गंभीर हो गई जब AAOA के प्रेजिडेंट ने रेजिडेंट्स के प्रति अत्यंत आपत्तिजनक, अपमानजनक और अस्वीकार्य भाषा का प्रयोग किया तथा यह आरोप लगाया कि रेजिडेंट्स “चोर” हैं और डॉक्यूमेंट लेकर भाग सकते हैं। इस बयान से आक्रोशित रेजिडेंट्स ने कड़ा विरोध दर्ज कराया।

रेजिडेंट्स के विरोध के बाद AAOA के सभी मेंबर्स बिना किसी औपचारिक समापन या निर्णय के जीबीएम छोड़कर भाग गए। इसके पश्चात जीबीएम में उपस्थित सभी रेजिडेंट्स ने सर्वसम्मति से हस्ताक्षर कर AAOA को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त करने का प्रस्ताव पारित किया।

रेजिडेंट्स ने यह भी निर्णय लिया कि AAOA द्वारा लिए गए सभी प्रमुख वित्तीय निर्णयों, विशेषकर FMS टेंडर, की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए। यह प्रस्ताव शीघ्र ही कोर्ट रिसीवर एवं रजिस्ट्रार को आवश्यक कार्रवाई हेतु सौंपा जाएगा।

रेजिडेंट्स का कहना है कि सोसाइटी का संचालन किसी भी स्थिति में तानाशाही, गाली-गलौज और अपारदर्शिता के आधार पर नहीं किया जा सकता। पारदर्शिता, जवाबदेही और रेजिडेंट्स की भागीदारी ही किसी भी संस्था की बुनियाद होती है, और इसी सिद्धांत के तहत यह निर्णय लिया गया है।

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